Posts

Showing posts from June, 2022

शेलार गणपति घाट, विश्रांतवादी - सफ़ाई कार्यक्रम

Image
  "हमारा पर्यावरण हमारे रवैये और अपेक्षाओं का आइना होता है।”   माँ हमेशा अपने बच्चों के लिए, परिवार के लिए, सर्वस्य अर्पण कर देती है और हमें इस भाव की कदर तब होती है जब माँ शारीरिक रूप से लाचार हो जाती है या परलोक सिधार जाती है। क्या प्रकृति की कहानी भी ऐसी कुछ नहि है? “ये मेरा काम नहि है” , “सरकारी कर्मचारी अनदेखा कर रहे है” - अपनी उत्तरदायित्व को अनदेखा करके दूसरों को दोषारोप करना बहुत सहज है। सभी धर्मों के ग्रंथो में इस बात का उल्लेख़ है की समाज पतन की और ग़लत लोगों के कारण नहि जाती, अपितु सक्षम और अच्छे   लोगों के कुछ ना करने के कारण जाती है। ये चिरसत्य है और पर्यावरण के परिपेक्ष में भी ये कहना ग़लत नहि होगा। हम यूँ ही शतुर्मुर्ग बने बैठे रहे, की सब ठीक है, मुझे क्या लेना और हमारे आस पास धीरे धीरे धरती रिसती रहे, नष्ट होती रहे, जल प्रवाह दूषित और सूखती रहे, वायु प्रदूषित होती रहे, पेड़, पौधे, पक्षी और जानवर की प्रजातियाँ विलुप्त होती रहे, पर हम केवल चर्चायें और निंदा करें।     विश्रांतवादी के शेलार गणपति विसर्जन घाट एक बहुत ही सुंदर घाट है। पर यहाँ भी उ...