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मातृछाया बालकाश्रम - २६ जनवरी

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दिनांक : २६ / ०१ / २०२२ जगह : दिघी , पुणे  - मातृछाया बालकाश्रम  जीवन सब के लिए समान नहि होता । किसी को ज़मीन नहि मिलती, तो किसी को आसमाँ नहि मिलता ! ये यथार्थ सत्य मेरे हर पल अनुभव किया है । अपने सार्वजनिक जीवन में मैं बहुत ऐसे संस्थायों में गयी हु जो सामाजिक रिश्तों से वांछित बच्चों या बुजुर्गों को सहारा देता है । और जितने बार भी मिली हूँ , मेरा स्नेह, मेरी सामवेदना इनके प्रति और बढ़ीं है । आपको लगता है की आप उनको कुछ देने जा रहे हो, पर हर बार आप अपने साथ जीवन की कोई सिख़ ले के आते हो। आज ७३वे गणतंत्र दिवस के उपलक्ष पर  मातृछाया बालकाश्रम  में मैंने कुछ पल बिताया । ४० बच्चों का घर है ये आश्रम । सबसे छोटा बच्चा ५ वर्ष का और सबसे बड़ा १४ वर्ष का । जीवन के राह ने इन बच्चों को समय से पहले स्वावलंबी और सम्बल बना दिया है। इनकी नम्रता और प्रतिभा देख कर मैं हमेशा ही प्रभावित हुयी हूँ । सच है ये तथ्य की भगवान जब जीवन का कोई पहलू आप से छिन लेता है तो दूसरी तरफ़ से आपको कोई ऐसा वरदान, कोई ऐसा हुनर, जोश इत्यादि दे देता है, की आप कमी से बाहर आ जाते हो । बस आपको उस भगवान के भेंट...